आज का मनुष्य शब्दों से घिरा हुआ है। मोबाइल, समाचार, सोशल मीडिया और अनगिनत विचार हर क्षण हमारे मन को व्यस्त रखते हैं। लेकिन इसी शोर के बीच एक ऐसी शक्ति छिपी है जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं — मौन।

मौन केवल बोलना बंद कर देना नहीं है। वास्तविक मौन तब जन्म लेता है जब मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। जब विचारों की भीड़ कम होती है, तब भीतर की चेतना स्पष्ट दिखाई देने लगती है।

सभी महान आध्यात्मिक परंपराओं ने मौन को विशेष महत्व दिया है। क्योंकि मौन में ही मनुष्य स्वयं को सुन सकता है। मौन में ही वह अपने भीतर के प्रश्नों और उत्तरों के निकट पहुँचता है।

जब हम प्रतिदिन कुछ समय मौन में बैठते हैं, तो जीवन की भागदौड़ के बीच भी एक आंतरिक संतुलन विकसित होने लगता है। धीरे-धीरे हम समझने लगते हैं कि शांति बाहर की परिस्थितियों से नहीं, बल्कि भीतर की स्थिति से उत्पन्न होती है।

मौन कोई खालीपन नहीं है। यह चेतना का वह द्वार है जहाँ से आत्म-ज्ञान की यात्रा प्रारंभ होती है।

— Kabir Shah
Author | Spiritual Thinker & Seeker

Kabir Shah – Author | Spiritual Thinker & Seeker | Constantly in search of the depths of the soul and the truth of life.

कबीर शाह लेखक | आध्यात्मिक चिंतक | साधक

मैं शब्दों से नहीं,
मौन से लिखता हूँ—
ताकि मन नहीं,
चेतना जागे।

मेरी रचनाएँ
अंतरलोक,
आत्मा की स्मृति
और सत्य की खोज हैं।

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